Saturday, July 2, 2016

परिचय



उसी उद्यान में
फूलों से
अपना परिचय
पूछती   रही
हवा!
नए अंकुर उसे भूल गए थे!
मैं,
मै उनके लिए समय था
और आज समय खुद
मुझ से 
अपना परिचय पूछ रहा है..

Wednesday, June 15, 2016

कविता




धरती पर
आकाश में
तुम्हारे   मेरे बीच में
कितनी कवितायेँ बिखरी पडी हैं?
उगने दो इन्हें
उगालो इन्हें
शब्दों के,
अर्थों के
वस्त्र इन्हें पहनाओ
छूलो इन्हें
महसूस करो
घटने दो इन्हें
संवार कर रखो
नई कोंपलें सुनेगी
खिलेंगी
लहलहाती रहेंगी ...