Monday, February 3, 2014

Vasant -14

सुना  है वसन्त आ गया है
मै ढूँढने निकल पडा, कही दिखाई नहीं दिया. शायद ऋतुराज होने के नाते साधारण लोगो से नहीं मिलता होगा! यह एक रिवाज होगा या कोई मजबूरी होगी - साधारण मनुष्य भी कितना साधारण कर दिया गया है...
वासंती हवाओं की तलाश में निकला था ---हवाइयां मिली चेहेरों पर! हरी हरी दूब से पटे हुए बड़े बड़े लान उस पर दौड़ते हुए रंग बिरंगे परिधानों में लिपटे शरीर,  क्यारियों में तरतीब से उगाये हुए फूल,   वसंत को करीने से प्रदर्शन के लिए लाया गया है.  पोस्टरों में वसंत उमड़ रहा है. आखिर वसंत को भी मनाना पड़ता है, मनाना चाहिए-  ऊपर से आर्डर है. 
फूल कुछ कहते हुए से क्यों नहीं लगते? पेड़ आमंत्रण क्यों नहीं देते? दूब दुलारती क्यों नहीं? वे रस भरी हवाएं कहाँ गयीं? वे हवाएं जो टेसुओ के इर्द गिर्द भागती फिरती है, मादक रस से भरे फूलों पर मंडराते हुए भंवरों के पंखो से चलती हैं, क्यों नहीं हैं यहाँ?

Tuesday, November 12, 2013

Warmth


रात को बारिश हुई और ढेर सारी बूंदे   यहाँ वहां  गिरी ..अब धूप निकल आई है ताजी दम...कुंवारी धूप ! गीली मिट्टी के अन्दर धंसती हुई धूप अंकुरण करती हुई धूप मन की गीली मिट्टी में घुसती हुई धूप ..जीवन का संचारण करती धूप ..लगता है कोई मासूम जीवन अस्तित्व में आ रहा है..मन में कई पेड़ पौधे उगने वाले है ... जंगली पौधे! प्यार से भरी भरी धरनी, उस पर धूप का निराला रहस्यमयी आवरण ..गुदगुदा गया. अरे! यही तो वह है जिससे मैं बना हूँ... किसी ने कहा तुम जितने बाहर हो उतने ही अन्दर हो. तभीतो मुझे लगता है मैं उग रहा हूँ.  कोपलें फूट रही हैं.. 
बरसात बीत रही  है धूप झिझकते झिझकते निकल   रही है….  नर्म धूप, आँच देती हुई. वातावरण  के पोर पोर में पानी बादल बन कर समा गया था .अब धूप के मृदुल स्पर्श से ऐसा लग रहा है जैसे जीवन का प्रादुर्भाव हो रहा है स्पष्ट  रूप से जीवन के संचार की अनुभूति हो रही है. नव जीवन का स्फुरण  हो रहा है धूप की अठखेलियाँ चल रही हैं, और जो महक वातावरण में फ़ैल रही है उसे केवल अनुभूत किया जा सकता है, वह वर्णनातीत है
सुबह सुबह नदियों की सतह से भाप उठने लगी है. घास भी ओस से लदी हुई  है--  एक दो बादल कुमार   आकाश में विचरण करते रहते  है  ---दिन, महीने वर्ष! यूँही भाप बन कर व्यर्थ उड़ते जा रहे हैं.कपूर की तरह हम जाने अनजाने में तिल तिल कर घटते जा रहे हैं. परन्तु दूसरी ओर आकाश में सुनहरे आवरण हिलते दिखाई देने लगे हैं. मन एक विशाल मंच बन गया है ... बिना किसी प्रयोजन   के इतना सब नहीं होता है

Friday, October 18, 2013

Breeze of Transit Winter

मुखौटा अधिक सुन्दर है

 यदि गंदा पानी सुवर्ण पात्र में भरा हो तो भी वह गंदा हे रहेगा                                                            
 अपनी गलतियों को सुंदरता का आवरण मत पहनाओ